Friday, August 21, 2009

अभी तक धुंध नहीं छटी

मित्रो देश कालओर परिस्थिति ये चीख चीख कर कह रही है किधुंध छंटने कि जगह बढती जा रही है एक दिन किसी ने कहा कि हमारे यहाँ यानि उत्तराखंड में साहित्यकार मुखिया बना है, उनके अंदर संवेदना है कुछ हालत बदलेंगे लेकिन अगले ही दिन कुछ लोग कहने लगे कि छद्म साहित्यकार हैं कोई राजनीतिज्ञ साहित्यकार नहीं हो सकता उसके अंदर संवेदना होगी भी तो राजनीती कि भेंट चढ़ चुकी होगी , फ़िर पिथोरागढ़ में बादल फट गए समस्या ओरगहरी हो गई विपछ तो तैयार ही था चिल्लाने लगा , कुदरत कि मार फ़िर विरोधियों की धार फ़िर भी सब चलता है, धुंध कम नहीं हुई अबकी बार तो जो मुखिया की दौड़ में थे दोनों ही साहित्यकार थे , माननीय निशंक जी ओर माननीय पन्त जी संवेदना के धनि दोनों ही लेकिन विद्वान् कहते हैं किसंवेदनाओं से राज नहीं चलते , अब कौन चलाये हम आपसे पूछते हैं कि कौन चलाये , बहुत दिनों से बड़ी पोस्ट भेजने का अवसर नहीं मिल रहा छमा करना व्यवधान गया फ़िर मिलेंगे
आपका अनुरागी

Wednesday, June 24, 2009

सांसो से सांसों का रिश्ता

बहुत दूर तक देखो हमारी सांसों का एहसास बड़ी सिद्दत से महसूस करोगे , दोस्तों ये दुनिया जिसे कुछ लोग भ्रम कहते हैं, और कुछ लोग इसे उपभोग समझाते हैं, लेकिन जीवन ब्रहमांड और प्रकृति कैसे आपस में गुंथे हुए हैं, इसे समझने के लिए अपने अंदर जगानी है संवेदनाओं की प्यास अनुभूतियों की भूख और हमारा साथ, हमारे से तात्पर्य साहित्य और अध्यात्म,
मनोज अनुरागी

Tuesday, May 12, 2009

भड़ास blog: भड़ास निकालने के लिए आपका स्वागत है!!!

hamse bahur door ek duniya hai. jo hamare hi charon oor faili hai, ham us chetana tak pahunchana chahte hain,
Manoj anuragi

ये है धुंध जगत

मित्रों,
ये जगत एक विराट धुंध में खोया हुआ जीव जगत है। जीवन में कैसी-कैसी धुंध है, हम अपने अनुभव आपके साथ बाँटने के लिए आ गए हैं धुंध जगत लेकर। मैं हूँ मनोज अनुरागी। एक ऐसा व्यक्ति जो संवेदनाओं के स्तर पर जीवन की परिकल्पना करता है। और आपसे भी उम्मीद करता है की आप भी इस संवेदना के स्तर पर अपनी चेतना को लाने का प्रयास करेंगे।
आप तैयार हो जाइये इस धुंध से परिचित होने के लिए।
आपका मनोज अनुरागी